रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान - दुर्ग (छ.ग.)
विधा- मुक्त, वाक्यार्थोपमा अलंकार
शीर्षक- *शुभ अमावस*
आये जो जीवन में अमावस
अशुभ ना मानना इसे,
खूद जलकर सारी दुनिया में
उजियारा लाता है सूरज,
लग जाय गर ग्रहण कभी तो
इसे हटना ही है।
इसी अमावस्या में हम कुछ पवित्र पर्व मनाते हैं,
ईश्वर की पूजा कर खुशहाली का वर माँगते हैं।
जैसे की बीज बोने पर हमें मीठे फल ही देता है
वैसे ही कर्म अच्छे हों तो शुभ ही शुभ होता है।
जैसे सूर्य चंद्र के साथ रहने से दिन विशेष यह होता है,
दान,पुण्य से जीवन में यह दिन खास बनाया जाता है ।।
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