पता - पेंडरवानी ,बालोद , छत्तीसगढ़
विषय - बाढ़
शीर्षक - पानी पानी और पानी
नगर शहर क्या ? गांव - गांव ,
बाढ़ पसारा जब अपना पांव ,
नदियां बन गई गली मोहल्ले ,
आना -जाना बस नांव - नांव ,
गली दरिया की रवानी में ,
पानी हममें कि हम पानी में ,
हम न समझें भींगते कि भींगाते ,
पावस आयी जब जवानी में ,
एक साथ कई जन का काल ,
बाढ़ बन आया विकराल ,
चारों ओर बस पानी पानी,
थर्रा उठी धरती विशाल ,
त्राहि- त्राहि मच गया फिर ,
ताल में जग नच गया फिर ,
दरख़्त जो सहारे थे ,
बस नदी के किनारे थे ,
ढह गया वो ताश सा ,
उखड़ गया यूं सांस सा ,
नदी तट सागर किनारे ,
सुनामी के , बाढ़ के मारे ,
देवालयों में अनाथ बेघर ,
हार गए करनी के हारे ,
प्रकृति में रोग नही ,
नर का संयमित उपभोग नही ,
प्रकृति का क्षरण हो तो ,
वृक्षों का यूं मरण हो तो ,
कहीं सूखा से आँख में पानी ,
या पानी - पानी और पानी ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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