रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-मुक्त छंद
विषय-प्राकृतिक आपदा (संदेह अलंकार)
शीर्षक- आपदाओं के छाया
पृथ्वी पे प्राकृतिक आपदाओं का छाया है
कहीं भूकंप तो कहीं चक्रवात टकराया है
कभी सूखे ने तो कभी बाढ़ ने त्रासद मचाया है
और अब की बार ये नया कोरोना कहर बरपाया है
सुनामी ने कईयों के घर -बार छीने
तो केदारनाथ नाथ में खो दीं जाने
चक्रवाती हवाएं उड़ा ले गई छते
और आसमानी कहर बन बिजली
ने पूरी कर दी बाकी कसरते
नए-नए आपदाओं से जूझता है जन-मानस
होती क्षति जन -धन की,भुखमरी है बढ़ती
अर्थव्यवस्था है डगमगाता, विकास को रोकता
प्राकृतिक आपदा हमे पीछे ही धकेलता
प्रकृति का रखें ख्याल आओ आपदाओं से पाएं मुक्ति।
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