स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला -जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा-आलेख
विषय-10 साल पहले मेरा गांव/मेरा शहर
छोटा गांव सुखी गांव
वर्तमान समय में महानगर ,नगर,शहर, बड़े बस्ती या गांव कोरोना के चलते सब निरर्थक हो गये हैं ।आज की आवश्यकता छोटा परिवार सुखी परिवार उसी तरह से छोटा गांव सुखी गांव । जहां मेरा जन्म हुआ है उसका नाम नवापारा खुर्द है आबादी लगभग 1000है जिसकी मोहल्ला छेरकाभांठा है जहां मैं रहता हूं ।जो सक्ती तहसील में जांजगीर-चांपा जिले के अन्तर्गत आता है ।10वर्ष के अन्तराल में विकास के नाम पर ज्यों का त्यों बना हुआ हैं ।
मुहल्ला सी सी रोड के लिए तरस रहा है बीस वर्ष पहले सड़क मुरुम गिट्टि वाला बना था वही आज विद्यमान है पहले सबके मकान मिट्टी के बने हुए थे आज सभी ईट के बन गए हैं ।आज विद्युत जल की पर्याप्त सुविधाएं हैं छोटे से गांव में रहना कुछ अभावों में रहना पड़ सकता है लेकिन अन्य कीअव्यवस्थाओं से अति उत्तम है । पास में तालाब है,नदी है नेशनल हाइवे से जुड़ा हुआ गांव है ।इस गांव में जो सबसे अधिक विकास या नवीनता देखने को जो मिल रहा है वह है नेशनल हाईवे सड़क जिसके निर्माण के लिए मैं स्वयं अपनी खेत की मिट्टी को निःशुल्क निर्माण के लिए दिया हूं । जिसे देख कर मन गदगद हो जाता है सुबह शाम घुमने का काम भी आ रहा है । छोटा सा गांव में कई लोग मुझसे पूछते हैं तुम्हारा समय कैसे कट जाता है कहने वाले मुझसे कह देते हैं परन्तु इस प्रकार सोचते कैसे हैं क्या व्यक्तित्व या चरित्र या शिक्षा विचार के निर्माण में महानगर का योगदान रहता है बिल्कुल नहीं । अपना गांव मुझे शांत लगता है एकाकी पन भी नहीं लगता सब अपने में मस्त रहते हैं । विकास छोटे से गांव में भी संभव है । मैं जीवन का 54बसंत देख चुका हूं ।यह मेरा अनुभव है ।
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