ग्राम - बुलाकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा- आलेख
विषय- मेरा गांव
दिनांक - 22/09/2020
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*मेरा गांव*
मेरा गांव आज से 10 वर्ष पूर्व बस्ती के रूप में हुआ करता था, वर्तमान में आवास योजना के तहत बस्ती उजड़ कर गांव से दूर पारा मोहल्ला का संवर्धन हो रहा है। चारागाह देखते-देखते आवास में बदल गया, गाय बैलों की चरागाह खत्म हो गया आज वर्तमान में पालतू पशुओं की स्थिति दयनीय हो गया है। आज चारागाह की कमी के कारण कोई गाय बैल और अन्य पशु रखना नहीं चाहते क्योंकि इसकी पोषण भरण के लिए चारा उपलब्ध नहीं है। चारागाह आवास में बदल गया। जल की स्थिति नदी,नाला, तालाब,कुआं में जल भरपूर होता था वर्तमान में जल का स्तर घटने लगा है। दिनों दिन जलस्तर घटने के कारण जल की समस्या हो रहे हो रही है। लकड़ी का उपयोग इंधन और मकान बनाने में होता था लोग पेड़ पौधों का अधिक उपयोग करने से धरा वनस्पति विहीन हो रही है। लकड़ी का भोजन बड़ा स्वादिष्ट लगता था। मिट्टी की ठंडी में भोजन पकाने से भोजन स्वादिष्ट लगता था। लोग नदी तालाब कुआं का पानी पीते थे और नहाते थे। पारंपरिक खेती करते थे,जिससे शुद्ध भोज्य पदार्थ मिलता था। यंत्रों का कम प्रयोग और पशुओं से काम लेते थे। गांव का मकान कच्चा और पक्का होता था। कच्चा मकान मानव शरीर के लिए उपयुक्त माने जाते हैं गर्मी,ठंड कम लगता है। गांव के लोग शारीरिक मेहनत करते थे।सभी एक दूसरे का सहयोग,सहकारिता,उपयोगिता पूरा भाव के साथ जीते थे। गांव में भाईचारा और सद्भावना का भाव दिखाई देता था। शादीयां सामान्य तरीके से सामाजिक नियमों के आधार पर होता था गांव और खेत खलिहान में चहल-पहल रौनक दिखाई देता था।आवागमन की सुविधाओं अंतर्गत बैलगाड़ी साईकिल का अधिक उपयोग होता था। शिक्षा के क्षेत्र में पहले पढ़ाई पर लड़कियों को ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। लोगों की जीवनशैली सामान्य थी। सुविधाएं ज्यादा नहीं थी। जो भी सुविधा था वह ग्रामीण जुगाड़ हुआ करता था। गांव के बच्चे प्रकृति से जुड़े हुए खेल खेलते थे। आपस में मेलजोल और भाईचारे की भावना बढ़ता था। एक दूसरे के प्रति विश्वास होता था। लोग श्रमशील हुआ करते थे।मेरा गांव का वातावरण पहले अच्छा था। गांव की भौगोलिक दशा और सांस्कृतिक व्यवस्था पहले अच्छा था।
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उर्मिला सिदार
रायगढ़(छग)
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