Tuesday, September 22, 2020

लीलाधर कुम्हार कृत आलेख- मेरा गांव

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ .ग. )
विषय - 10 वर्ष पहले मेरा गाँव
विधा - आलेख सृजन
शीर्षक - बदला-बदला सा मेरा गाँव
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#  बदला - बदला सा मेरा गाँव #

        आज से 10 वर्ष पहले मेरा गाँव धाराशिव  बहुत ही अलग था । उस समय का वातावरण व दृश्य जब  स्मरण करता हूँ , तो मेरा मन एक अनिर्वचनीय आनंद में खो जाता है । गाँव के चारों तरफ खुला मैदान था जहाँ गाँव बच्चे अक्सर कबड्डी या क्रिकेट खेलते रहते थे । आम , जामुन , नीम और बेर के अनेक वृक्ष गाँव के आस - पास पाये जाते थे । हम लोग भी हवा खाने के लिए घूमने निकल जाते थे । तालाब व नाले में नहाना बहुत अच्छा लगता था । गाँव मे बहुत कम दुकान होते थे । सबसे बड़ी बात उस समय 3000 की आबादी वाले हमारे हाई स्कूल भी नहीं था । गाँव के बच्चे नाला पार करके बिलाईगढ़ पढ़ने जाते थे । दुःख की बात ये  है कि उस नाले पर आज तक पुल नहीं बन पाया है जिस कारण सभी ग्रामीण परेशान रहते हैं । 
        पहले मोबाइल , टी.वी. , मोटरसाइकिल और दुकान गाँव मे बहुत कम थे । तब लोग गली , चबूतरा या किसी के घर मे ही बैठकर गपशप , मनोरंजन  आदि कर लिया करते थे । अपनापन का अनुभव हमारे गाँव की सर्वोपरि विशेषता है जो अभी भी देखने मे आता है । पहले स्वच्छता का बहुत अभाव था । जब प्रधान मंत्री आवास आया व शासन का स्वच्छता अभियान चला तो हमारे गाँव मे जबरदस्त बदलाव आया । पक्के मकान बनने  लगे और साफ - सफाई का महत्व सबको समझ मे आने लगा । इसके बाद भी हमारा गाँव गाँव ही था । शहरों के प्रभाव से मुक्त था । बीते दस वर्ष में आंशिक परिवर्तन हुआ है । गाँव की मौलिकता व परम्परा लगभग स्थिर है ।
       हमारा धाराशिव पहले बहुत पिछड़ा हुआ और अशिक्षित गाँव था । गाँव में गरीब किसान एवं मजदूर वर्ग के लोगों की संख्या ज्यादा है । अतः अभी भी कोई विशेष। परिवर्तन या सुधार नहीं हुआ है ।  जब सन् 2016 मे हाई स्कूल खुला तो गाँव के बच्चों में शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ता गया । फिर भी इतने बड़े गाँव मे 15 कर्मचारी भी आपको नहीं मिलेंगे । आपस मे प्रेम - व्यवहार एवं पूछ - परख आज भी कायम है ।  सुख - दुःख में सहयोगी होकर मिलकर रहते हैं । 
        आज मेरे गाँव मे ट्रैक्टर , बाइक , दुकान एवं पक्के मकानों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है । गाँव के चारों तरफ नये - नये मकान बन गये । मैदान सिमट गये और गाँव की हरियाली भी कम हो गई है । जंगल से लगा हुआ पठारी गाँव होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता कम नहीं है । शासन द्वारा नर्सरी या वृक्षारोपण  से आज भी जंगल का मनोहारी दृश्य ज्यों का त्यों बना हुआ है । कोरोना के कारण खान - पान में भी सुधार हुआ है । लोग बाहरी वस्तुओं से बच रहे हैं । कुल मिलाकर मेरा गाँव सही मायने मे गाँव को चरितार्थ करती है ।

धाराशिव नाम है ,
             मेरा प्यारा गाँव  ।
प्रेम और शांति का ,
             चहुँ ओर फैलाव ।।

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