Tuesday, September 29, 2020

नलिनी बाजपेयी की रचना- मन

रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर (छ. ग.)
   विषय-भय ग्रस्त है मन
(अतिश्ययोक्ति अलंकार का प्रयोग)
  

        *भयग्रस्त है मन*

भयग्रस्त है मन,
     कोरोना ने मचाया आतंक,
साँसे चलती नहीं,
      जिएं जा रहे है सशंक।

डरता हुआ मन 
     आकाश  में लगाया छलांग,
पहाड़ों पर भी छुपाता 
          मचाता अतलंग।

लगता है गिरि, 
         गह्वर में छुप जाऊँ
महामारी को साँसों 
      के फूफकार से मार भगाऊँ।

मन कभी उड़ता 
       आकाश जा बैठता
 सितारों के पास,
       त्राहिमाम-त्राहिमाम 
करता लिए प्राणों की आस।

*अतिश्योक्ति अलंकार का प्रयोग*

1.साँसे चलती नहीं जिएं है रहे सशंक
2.महामारी को साँसों के फुफकार से मार भगाऊँ।
3.मन कभी उड़े आकाश जा बैठता सितारों के पास।
4.डरता हुआ मन आकाश में लगाया छलांग।
_________________
      नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर, कांकेर ,(छ. ग.)

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