विषय _रोजगार
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _हाय रोजगार की आस में
हाय रोजगार की आस मे कर्ज ले पढ़ाया |
कितनी मेहनत की नौकरी पाने की हाथ ना कुछ आया |
पढ़ेगा लिखेगा तो बनेगा नवाब ये शब्द रास ना आया |
पढ़ लिखकर भी वो नौकरी के लायक ना बन पाया |
ये कैसी योजना होती है हमें समझ नहीं आया |
फार्म भरने के ही लगते है सौ हजार रुपईया |
गरीब फार्म भरे या करे पढ़ाई भाया |
डिग्री लेकर भी लोगो ने चपरासी का फर्म भराया |
खेत खलिहान बिके नौबत कर्ज लेने के बाद आया |
सब कुछ रोजगार की लालच मे गया तो आँख भरआया |
लोन की भी प्रक्रिया जटिल है कैसे लाभ बताया |
रात दिन बैंक के चक्कर काटे तब धन थोड़ा पाया |
उसमे भी सही दिशा ना मिले तो क्या लाभ पाया |
कितनी मेहनत की नौकरी पाने की हाथ कुछ ना पाया |
पढ़ले एक अफसर बनेगा ये जुमला काम ना आया |
बड़ी बड़ी डिग्रियां लिया फिर भी नौकरी ना पाया |
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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