Saturday, September 26, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- रोजगार

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-रोजगार
विधा-कविता (मुक्त छंद)
 
करोना के कहर ने तो कर दी,
लोगों को फिर से बरोजगार ।

बसा हुआ था परिवार फिर से ,
हो गया अब घर परिवार तबाह।

घर में बिलखते  नन्हेें बच्चे रोज,
और तड़पती  बेचारी बूढी़ माँ ।।

कैसे  करें बसेरा अब हो गये बेगार
करोना ने छीनी सबके  रोजगार ।

जर्जर हुआ घर द्वार बिन रोजगार,
रोजगार की आस में बैठे हैं बेगार।


मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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