जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-रोजगार
विधा-कविता (मुक्त छंद)
करोना के कहर ने तो कर दी,
लोगों को फिर से बरोजगार ।
बसा हुआ था परिवार फिर से ,
हो गया अब घर परिवार तबाह।
घर में बिलखते नन्हेें बच्चे रोज,
और तड़पती बेचारी बूढी़ माँ ।।
कैसे करें बसेरा अब हो गये बेगार
करोना ने छीनी सबके रोजगार ।
जर्जर हुआ घर द्वार बिन रोजगार,
रोजगार की आस में बैठे हैं बेगार।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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