रचयिता- पुष्पा पटनायक
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा-निबंध
शीर्षक -"समाज सेवा"
अपनी और अपने लोगों की सेवा तो हर कोई करता है पर जो दूसरों की सेवा करें वह भी बिना कुछ लाभ के सही मायने में यही समाज सेवा है ।
समाज सेवा को कई लोगों ने परिभाषित किया है और सार रूप से यही बात सामने आती है कि समाज को मानव बनाता है और मानव ही बिगड़ता है ।जब वही मानव समाज को ऊपर उठाने के उद्देश्य से जो भी नेक कार्य निस्वार्थ रूप से करता है । वह समाज सेवा में गिना जाता है।
समाज सेवा कार्य व्यक्तिगत अथवा सामूहिक दोनों तरह के होते हैं। व्यक्ति के व्यक्तिगत सेवा कार्य में व्यक्ति की पहचान और नाम अक्सर गुप्त रह जाते हैं ,जबकि सामूहिक रूप से सेवा कार्य किसी सामाजिक संगठन के साथ करते हुए अपनी छवि समाज मे प्रति लक्षित कर पाने में सक्षम होते हैं ।प्रायः व्यक्तिगत समाज सेवा वही व्यक्ति कर करते देखे जाते हैं जो धनाढ्य परिवार से आते हों एवं आर्थिक परिपाटी के तहत वह कई लोगों के जीवन स्तर को उठाने में सक्षम हो भी जाते हैं। वहीं सामूहिक सेवा में व्यक्तियों के आपस में सहयोग की भावना परिलक्षित ही नहीं होती बल्कि वे बड़े से बड़े कार्य को लक्ष्य प्राप्ति तक बड़ी आसानी से ले जा पाने में सक्षम होते हैं । समाज उनके कार्यों को सम्मानित करते हुए उन से जुड़ता चला जाता है ।
वर्तमान में समाज सेवा का चलन बढ़ा है या यूं कहें कि लोगों में अपनी छवि को समाज में प्रचारित करने का जुनून है ।किसी को कुछ दे दिया या किसी त्रासदी जैसे बाढ़, भूकंप या फिर वर्तमान की महामारी कोरोना को ही ले लीजिए आए दिन मास्क बाटते हुए फोटो व्हाट्सएप पर आपको दिखते होंगे। मेरा मानना है कि यदि आप किसी को आर्थिक या किसी वस्तु विशेष से मदद देते हैं उस समय आप जैसा अनुभव करते हैं क्या मदद लेने वाला भी आपके ही जैसा ही अनुभव करता होगा ? समान या कोई वस्तु लेते समय फोटो खींचानें के लिए क्या उसका मन खुशी से सहमति जाहिर करता होगा? तनिक चिंतन करने की आवश्यता है। समय परिस्थिति वश कोई किसी चीज के लिए महरूम हो जाता है इसका यह मतलब नहीं कि उसकी इस कमी का हम फोटो खींच -खींच कर उसके कमी का प्रचार करें। यह सर्वथा सेवा भाव के प्रतिकूल व्यवहार का प्रदर्शन करना है।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसकी कल्पना समाज से परे नहीं की जा सकती । समाज , सेवा के लिए उपयुक्त स्थान है , जहाँ मानव उसकी प्रगति उन्नति में बराबर सहभागिता दे सकता है । प्रत्येक व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत एवं सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करने लगे तो समाज को स्वर्ग तुल्य होने में देर न लगेगी।
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