Monday, September 28, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- कृषक

रचनाकार- उर्मिला सिदार 
ग्राम  -बुलाँकी
 जिला -रायगढ़ छत्तीसगढ़
 विधा -कविता
 विषय -कृषक
 दिनांक -28/09 /2020
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              *कृषक*
 धरा का पूज्य वर है वह,
 है कृषक मेहनती किसान।
 बंड्डी, धोती कंधे पर साफा,
 है वह किसान का  पहचान।

 धरा उसकी जन्म भूमि है ,
मिट्टी से करता प्यार ।
कठिन परिश्रम कर वह,
पोषण अन्न करता तैयार।

 सुबह- शाम तक खेतों में,
 हरदम करता रहता काम।
 पसीने से सराबोर हो,
 उगाता खेतों में धान।

 चाहे सर्दी हो या गर्मी ,
 कर्तव्य पथ पर डटा रहता।
 फिर भी मानव का पेट न भरता,
 समाज में अपमानित हो जीता।

 हरियाली फसल उनका शान,
 खेतों में बसा है उनका जान।
 फसलों का करता वह सम्मान,
 धरा का नित करें गुणगान।

 गाय ,बैल उसका है साथी,
 चंदन है खेतों की माटी।
 लहराते खेत देख होता सुखी,
 उगाता अन्नदाल, सब्जी ,रोटी।

 बंदन है पूज्य वह किसान,
 कभी ना थके तेरा मन।
 तेरी मेहनत का सम्मान,
 करे जन-जन तेरा गुणगान।

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 व्याख्या:- इस कविता में किसान की गुणगान की गई है।
 कहीं-कहीं अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग किया गया है।

 उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़

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