स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता(विशेषोक्ति अलंकार पर आधारित)
विषय--खेती की मार
मेरे दो दो बैल होकर ।
ट्रैक्टर खेत में चल रहा ।
बेटों को सोचना चाहिए ।
एक मैं ही उबल रहा ।
खेत तो अनगिनत है ।
बोनी भी हो रही ।
पानी का साधन है ।
ले दे जीवन चल रहा ।
खाने वाले सब हैं ।
मेहनत से जी चुराते ।
घर में जहां पैसा दिखा ।
वह भी कुछ पल रहा ।
खेती सस्ती रोती है ।
मंहगी वाली हंसती है ।
किसान दोनों के बीच ।
सूरज रहते जल रहा ।
लाभकारी है नाम की ।
नहीं है कोई काम की ।
कहां उन्नति ग्राम की ।
आज भी है कल रहा ।
जय कहते किसान की ।
इसमें भेद छिपा है ।
अन्न उपजाकर भी ।
आज उसको खल रहा ।
किसी दिन खेती छोड़ेगा ।
अन्तिम यह परिणाम है ।
खेती पर लड़ रहे नेता ।
जो अभी टल रहा ।
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