Friday, September 11, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- अंधविश्वास

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
विषय-अंधविश्वास
शीर्षक- *बिल्ली ने रास्ता काटा*
अलंकार-निदर्शना अलंकार
विधा-मुक्त छंद

अंध विश्वास की  वेदी पर 
आज धरा  क्योंअकुलाती है।
बिल्ली ने अब रास्ता काटा है
मन में  यह बात क्यों आती है।

कभी आसमां में काले बादल
घनघोर घटा लेकर आते हैं।
फिर काला रंग अशुभ है,
क्यों मर्म समझ नहीं पाते है।

कभी  समय का फेर कहें तो ,
अर्थ काअनर्थ हो जाता है।
समय का चक्र सही चला तो
सर्प का विष दवा बन जाता है।

भाव भरा हो मन में तो सच 
पानी अमृत  बन जाता है,
विकट स्थिति निर्मित हो तो,
समय अपनों से लड़वाता है।।

अंधविश्वास की कालिख को ,
समाज से  जल्द दूर हटाना है।
शिक्षा का मशाल लेकर आओ,
नया सबेरा  समाज में लाना है।।

*मीरा आर्ची चौहान*
*कांकेर, छग*
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*निदर्शना अलंकार-*
1- बिल्ली ने रास्ता काटा।
2-काले बादल घन घोर घटा
ले आते हैं।
3-फिर काला रंग अशुभ कर्मों।
4-सर्प का विष दवा बन जाता।।
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