Friday, September 11, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- अंधविश्वास

रचनाकारा :-नलिनी बाजपेयी
         संबलपुर, जिला-कांकेर (छ .ग.)
   विषय :- *अंध विश्वास*
(निदर्शना अलंकार का प्रयोग)
   
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~ •°• *अंध -विश्वास* •°• ~
जाने क्यों मानव अंध विश्वास 
पर विश्वास करता है,
ज्यौं धरा पर पाप कर स्वर्ग 
की आस करता है।

तारणहार आएगा सोच 
परिवार बढ़ाता है,
लड़कियों को भूल लड़कों 
से लाड़ लड़ाता है।

लड़कियों को शिक्षा-दीक्षा 
देने में करता संकोच,
बेटा  पानी देगा तारणहार 
बनेगा है ऐसी सोच।

बदला युग मायने सारे 
अब गए हैं बदल ,
बेटों से ज्यादा वफादार 
होती हैं बेटियाँ संभल।

आया है नवयुग सोच नई 
पर मत डालो खलल,
बेटा-बेटी दोनों में भेद नहीं 
करो तुम अभिनव पहल।

*व्याख्या* :- प्रस्तुत कविता में मनुष्य के विचार जिसमें बेटा ही मोक्ष 
दिलाएगा।तारणहार बेटा ही होगा।ऐसे 
अन्धविश्वासों पर चर्चा की गई है।

*निदर्शना अलंकार का प्रयोग*

1.धरा पर पाप कर स्वर्ग की 
   आस करता है।
2.तारणहार आएगा  सोच 
    परिवार बढ़ाता है।

       नलिनी बाजपेयी
   संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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