रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर ,छग
शीर्षक-समाज सेवा
विधा-निबंध
मनुष्य धरती पर जन्म लेता ह|विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता हुआ मर जाता है|पर समाज में ऐसे भी लोग हैं जो उदर पोषण के साथ- साथ समाज को कुछ ऐसा दे जाते कि लोग उनके पद चिह्नों पर चलने को लालायित हो जाते हैं,ऐसे ही व्यक्ति समाज सेवी कहलाते हैं|
जिंदगी एक दस्तावेज की तरह है|जो हुआ लिख दिया|जो हो रहा है लिख रहा है और आगे के पन्ने कोरे हैं|आइए चार दिन की जिंदगी में दो दिन तो उदर पोषण में चले गए|बचे हुए दो दिन को समाज सेवा में लगाये|जैसा कि कलाम जी ने भी कहा है|या तो ऐसा कर जाओ या ऐसा लिख जाओ कि इस दुनिया से गुजर जाने के बाद भी लोग तुम्हें याद करें|
विचारों की शक्ति बहुत प्रबल होती है|अपने विचारों से किसी का आत्मबल बढ़ा सके|किसी की नकारात्मक विचार को सकारात्मक सोंच में परिवर्तित कर सके तो यह सबसे बड़ी समाज सेवा होगी|
हमारे पास जो भी धन हैं उसका 5%भी शिक्षा से वंचित किसी बच्चे का भविष्य बना सके तो सबसे बड़ी समाज सेवा होगी|
आइये सकारात्मक सोच के साथ
कुछ नया करने का प्रयास करें ताकि लोग कभी हमें जानें तो कहें *अरे! हम ऐसा क्यों नहीं हुए|*
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर ,छग
No comments:
Post a Comment