Friday, September 18, 2020

गिरधारी लाल चौहान कृत निबंध- समाज सेवा

नाम -गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला- जांजगीर-चांपा ( छत्तीसगढ़)
विधा- निबंध
शीर्षक--- समाज सेवा
व्याख्या- लेखक के द्वारा बतलाया गया है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज में रहता है उसकी सेवा सुश्रुषा  एवं देखभाल करता है ।
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 एक व्यक्ति द्वारा एक जाति एक वर्ग एक समूह का नि:स्वार्थ भाव से बिना लाभ के बिना किसी को हानि पहुंचाये किये जाने वाले समाज के लिए कार्य समाज सेवा की श्रेणी में बांधा जा सकता है ,यह क्षेत्र आर्थिक, शैक्षिक,स्वास्थ्य संबंधी,न्याय संबंधी कार्यों में देखें जा सकते हैं ।
समाज,देश,राज्य, लोगों के प्रति सेवा भावना का बीज मानवों के असमानता ऊंच नीच शिक्षित अशिक्षित की विद्यमान खाई को समाप्त करने एवं एकता ,समानता , नारी उत्पीड़न शांति की स्थापना करने के लिए त्याग समर्पण दया के रुप में इसकी उत्पत्ति होती है ।संत कबीर,गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, दयानंद सरस्वती,स्वामी विवेकानंद आत्मानंद आदि के द्वारा लोगों के प्रति किये कार्य समाज
सेवा का कार्य है ।
आधुनिक समय में धन लोलुपता यश नेता गिरी कुछ सहयोग के बदले सहयोग को समाज की सेवा कहते फिरते हैं , ये समूह या समिति के लोग कुछ पदाधिकारियों का चुनाव कर लेते हैं और अपने समूह के लिए धन उगाही का काम करते हैं  प्राप्त धन में सेकुछ धनों को लोगों के हित में व्यय करते हैं और शेष धन से आराम फरमाते हैं ।
         समाज सेवा का क्षेत्र बहुत ही व्यापक है एक अच्छे समाज की कल्पना शिक्षा, संस्कार, संस्कृति, श्रेष्ठ विचार धाराएं ,लक्ष्य की प्राप्ति,धर्म,कर्म, रोजगार, परिवार, मानवता,सत्यता, कर्त्तव्य की भावना उदारता दया दान गुणों के विकास में योगदान देने से ही फली भूत होगा ।
"  हम समाज के ठेकेदार नहीं,हम उसके सेवा दार हैं ।
जनजागृति हमें लाना है, देखना कहां फैले अंधकार है ।"

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