रचनाकार:-एच-एस-अरमो,"अरमान "
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विषय-रोजगार ।
शीर्षक--"शिक्षा बनाम रोजगार "
विधा-विरोधाभास,अलंकार ।
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===|||""शिक्षा बनाम रोजगार ""|||==
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हसरतों के बाजार में---
उम्मीदों की रुसवाई मिली ।
अंग्रेज़ी भाषा के,फैलाव ने,
हिन्दी पाठशाला की खुशियाँ हैं छिनी।
आज शासकीय पाठशाला को,कर रहे दरकिनार---
निजी,अंग्रेज़ी मीडियम स्कूल की पुकार---
मँहगी हुई पढ़ाई,सँस्कृति में,गिरावट हुई---
उच्चाकांक्षाओं की,आज फसल बढ़ाई।
डाँक्टर,इन्जीनियर बनने की होड़,
कोचिंग संस्थाओं की गठजोड़ ।
लालच,सफलता की,हैं दिखाते,
बुध्दिमता बिन,वो कुछ न पाते ।
उदारीकरण,वैश्वीकरण के दौर में---
बौद्धिक गुणवत्ता,उच्च तकनीकी ज्ञान,
अनुभव,व्यक्तित्व- विकास की बातें,
रोजगार में,खूब माँग ,है बढ़ी--।
जिसमें होती ,ऐसी क्षमताएं---
विश्व-उड़ान में,वो कदम है रखता ।
रोजगार के,वो अवसर है पाता---
देशप्रेम से,वो कोसों दूर हो जाता ।
कौशल दक्षता बिना पढ़ाई---
ज्ञान तो,उससे हममें है लाई ।
पर,आत्मनिर्भरता नहीं है लाई--
इसलिए,हमें रोजगार से दूरी कराई ।
हालांकि,मानते हैं,रोजगार है नहीं,
बेरोजगारी की,होती हैं,ढेरों बातें---
कोरोना महामारी ने,कमाना है सीखाया,
जीने का,नया-नया हुनर है बताया ।
पैतृक करोबार से,हैं मुँह मोड़ते---
आत्मग्लानी और पिछड़ापन समझते,
शासकीय नौकरी की,तलाश में जूझते,
उम्र बढ़े,नौकरी ना मिले,मिले हताशा,
बेरोजगारी बढ़ी,रोजगार बना तमासा ।
आओ व्यावसायिक,बुनियादी शिक्षा सिखाये---
बचपन की पौध में,आत्मनिर्भरता लाये,
रुचिकर पढ़ाई की लालसा जगाये---
रोजगार की,कोई कमी ना होगी,
फिर,बेकारी की,बात ना,कभी उठेगी ।
जागो-जागो,नौजवान भारतवासी--
आत्मनिर्भरता,स्वदेशी को अपनाना है,
शिक्षा-ज्ञान और कौशल दक्षता से---
रोजगार के अवसर को,और बढ़ाना है,
जनमानष में,जनजागृति लाना है ।
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व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि शिक्षा से ही बेरोजगारी दूर होगी व आत्मनिर्भरता व रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं ।
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