जिला - कोरबा छत्तीसगढ़
विषय-रोजगार
विरोधाभास अलंकार
शीर्षक-" हांसिल सिफ़र-सिफ़र "
बेतहाशा दौलत लुटाऐ माँ-बाप ने इस कदर ,
पढ़कर बनेंगे बच्चे डाँक्टर और इंजिनीयर
हांसिल सिफ़र-सिफ़र रहा,
रोजगार का तो आलम मत ही पूछे कोई
हांथ से दौलत भी गई।
कितना भी मेहनत किये नौजवानों नें
घर का छप्पर बिक गया
रोजगार बिल्ली का दूध बन गया
रहनें को छत भी ना रहा ।
हांथ में लेकर सर्टिफिकेट लेकर घुम रहे थे देश के होनहार नौजवाँ,
अब हालात ये है कि
कोरोना के दहशत से मजबूर हैं चौखट से बंधे रहने को ।
।।इति।।
गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
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