Monday, September 7, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- भ्रमर

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदा बाजार ( छ .ग. )
विधा - छंद मुक्त कविता 
विषय - भ्रमर ( उदाहरण अलंकार )
शीर्षक - भ्रमित भ्रमर

कमल की पंखुड़ियों पर
बेसुध पड़ा है
एक भ्रमर ,
खुशबू की नशे में चूर ।
शाम होते ही 
सूर्य की अनुपस्थिति में 
कमल की पंखुड़ियाँ
सिमट जाती हैं ,
और भ्रमर 
सजाता है
स्वप्न की दुनिया
रात भर 
शेखचिल्ली की तरह ।
सबेरे
उसी तालाब में
एक हाथी आता है 
और अपनी सूँड़ से 
कमल को उखाड़कर
कुचल देता है
पैरों तले ।
बेचारा भ्रमर
अपनी स्वप्निल दुनिया सहित
काल के गाल में समा जाता है ।
यदि
चाहता तो
वह भ्रमित भ्रमर
बुद्धि व बल का उपयोग करते हुए
बचा सकता था
अपनी जान ,
किन्तु विषय - वासना की 
चाहत
किंकर्त्तव्यविमूढ़ बना देता है 
मनुष्य की भाँति 
जो घिरा है
पाँच विषयों से -
शब्द स्पर्श रूप रस गंध ।

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