जिला - बलौदा बाजार ( छ .ग. )
विधा - छंद मुक्त कविता
विषय - भ्रमर ( उदाहरण अलंकार )
शीर्षक - भ्रमित भ्रमर
कमल की पंखुड़ियों पर
बेसुध पड़ा है
एक भ्रमर ,
खुशबू की नशे में चूर ।
शाम होते ही
सूर्य की अनुपस्थिति में
कमल की पंखुड़ियाँ
सिमट जाती हैं ,
और भ्रमर
सजाता है
स्वप्न की दुनिया
रात भर
शेखचिल्ली की तरह ।
सबेरे
उसी तालाब में
एक हाथी आता है
और अपनी सूँड़ से
कमल को उखाड़कर
कुचल देता है
पैरों तले ।
बेचारा भ्रमर
अपनी स्वप्निल दुनिया सहित
काल के गाल में समा जाता है ।
यदि
चाहता तो
वह भ्रमित भ्रमर
बुद्धि व बल का उपयोग करते हुए
बचा सकता था
अपनी जान ,
किन्तु विषय - वासना की
चाहत
किंकर्त्तव्यविमूढ़ बना देता है
मनुष्य की भाँति
जो घिरा है
पाँच विषयों से -
शब्द स्पर्श रूप रस गंध ।
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