Monday, September 7, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- भ्रमर

रचनाकारा :-नलिनी बाजपेयी
       संबलपुर,जिला-कांकेर,(छ. ग.)
      विषय :- *भ्रमर*
(उदाहरण अलंकार का प्रयोग)
     
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 ~ •°• $ *भ्रमर* $•°• ~

मैं श्यामल गात लिए 
गुन-गुन राग लिए आता हूँ,
प्रेमी मन में ज्यौं 
राग मिलन के गाता हूँ।

कली-कली,फूलों पर 
इठलाता मंडराता हूँ,
सन्ध्या संग पंखुड़ियों को 
ज्यौं शयन कक्ष बनाता हूँ।

कलियों संग मुस्कुराना 
सीख जाता हूँ,
जैसे जग को गुनगुना कर 
राग मल्हार सुनाता हूँ।

मैं प्रेमी हूँ मकरन्द पान कर 
सुध-बुध खोता हूँ,
ज्यौं नर आनन छवि निरख 
सब दांव लगाता है।

फूलों का रस पी 
परागकणों को बिखराता हूँ,
उनकी सृष्टि बनी रहे 
अहम भूमिका निभाता हूँ।

इधर उड़ता,उधर उड़ता 
जग को गीत सुनाता हूँ,
कभी गिरता कभी टकराता 
और उड़ जाता हूँ।

प्रकृति का प्रणय गीत बन 
सबके मन को भाता हूँ,
कदम-कदम पर जैसे 
प्रेम-अमरत्व सिखाता हूँ।

*उदाहरण अलंकार का प्रयोग*-

1.ज्यौं राग मिलन के गाता हूँ।
2.ज्यौं शयन कक्ष बनाता हूँ।
3.जैसे जग को गुनगुनाकर 
    मल्हार सुनाता हूँ।
4.ज्यौं नर आनन छवि देख 
    सब दांव लगाता है।
5.जैसे प्रेम -अमरत्व    
    सिखाता हूँ।
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     नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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