संबलपुर, जिला-कांकेर, (छ .ग.)
विषय-प्रतिध्वनि
*प्रतिध्वनि*
राजनीति के अर्थ बदल गए
सेवाभाव सब धरे रह गए,
आत्मा की प्रतिध्वनि
देती नहीं सुनाई,।
मन्दिरों में पूजा के भावों
में आ गई रूखाई।
नैतिक मूल्यों का जो
ह्रास कर रहा ,
समाज में वही खास
और सरताज हो रहा।
इस दलदल से अपने
को बचाना है,
मानव और मनुष्यत्व
को बचाना है।
मानव मूल्यों पर नित
आघात हो रहा है,
मानवता और इंसानियत
तार-तार हो रहा है।
आओ हम सब
युग निर्माण करें,
मानव होने का हम
धर्म निर्वाह करें ।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
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