रचनाकार-एच-एस-अरमो ''अरमान "
जिला--रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक--""जिंदगी ""
विधा-अन्योक्ति अलंकार ।
विषय--"भावी सुबह" ।
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$$$=="""जिंदगी """===$$$
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आज तिलिस्म बन गई है,
हर किसी की ज़िंदगी,
महामारी के,भय से---
मौत का खौफ बना है,
अनायास खौफ़नाक हुई जिंदगी ।
जीने की हसरत रखते हैं,सभी,
पर,आज भावी-सुबह--हुई,
खौफ से भरी,हमारी जिन्दगी ।
धन-दौलत,रौबदारी की ठाठ होती है,
पर,फीकी पड़ी,समय-बयार से---
कल के,सुनहरे-सपनों के खातिर ,
समय से कर लिया,हमनें समझौता ।
दार्शनिक सोच रखो ,सदा यारों,
कर्म किये जा,लक्ष्य-परख तुम,
परिणाम की,चिंता मत करो ।
हर एक, रात के बाद सुबह होती,
दुःख के बाद,सुख भी आते,
सबकी जिन्दगी में,निराशा भी दूर होती।
आत्मविश्वासी,सकारत्मक सोच रखते,
मुसीबत को,वो खिलौना हैं,समझते ।
हौंसलों से,सामना हैं करते,
कभी घबराता नहीं---
बल्कि,हल करने की सोचते ।
भावी-सुबह लिख रही,एक इबारत,
अब ,हर एक के हाथों में---
होगा मोबाईल,इसके बिना ,
हम एक कदम भी,चल नहीं पायेंगे,
बेजान सी लगेगी,हमारी जिन्दगी।
कार्यालय,शिक्षालय ,अस्पताल व --
बाजार और सभी लोग भी,
इंटरनेट की चकाचौंध में,उलझे ,
कभी जिन्दगी उलझती ,तो कभी,
सुलझती,इसके फेर से ।
-----------------इति---------------
व्याख्या-इस रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति की जिन्दगी में भावी -सुबह की सोच को रखने की कोशिश की है ।
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