रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा मुक्त छंद
विषय- शांति चेतना( दृष्टांत अलंकार)
शीर्षक-शांति की तलाश
खो रही बंधुत्व-भाईचारा
विकट परिस्थितियों की मार है
सम्पूर्ण सृष्टि को आज
शांति चेतना की दरकार है।
सुनहरे दिन बीत गए ऐसे
जैसे मुठ्टी से फिसलती रेत हो
जान बचाने को व्याकुल सब
मन का सुकून जैसे खोज रहे
देश -काल समय परिस्थिति
गिरगिट के जैसे बदल रहे
शांति और आध्यात्म की तलाश में
सब यहां वहां भटक रहे
विदेशी ताकते भी शांति
छिनने को आतुर हैं
हथियारों के दम पर ही
शांति की उम्मीद है
शांत धरातल पर आज
अशान्ति की पुकार है
हाहाकार मची सब ओर
शांति चेतना की तलाश है।
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