Tuesday, September 8, 2020

मोनालिसा बेहरा की रचना- रिश्ते

रचियता-मोनालिसा बेहरा
रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-मुक्त छंद काव्य
शीर्षक-ये रिश्ते

कितने अजीब होते हैं ये रिश्ते
समझने की जितनी कोशिश करती हूं
उतने ही उलझते जाते हैं ये रिश्ते
कभी मजबूरी में निभाने पड़ते हैं रिश्ते
तो कभी कोशिशों के बाद भी टूट जाते हैं रिश्ते
कुछ जन्म से जुड़े होते हैं रिश्ते
पर नाजुक डोर से बंधे होते हैं रिश्ते
हवा के झोंके से ही बिखर जाते हैं रिश्ते
कितने तरह के होते हैं ये रिश्ते
कहीं प्यार,ममता और अपनापन से
तो कहीं मुहब्बत से जुड़े होते हैं रिश्ते
कहीं अपनेपन की तलाश में
तो कहीं कर्तव्यों के बोझ से
दबे होते हैं रिश्ते
कहीं बोझ में घुट जाते हैं रिश्ते
तो कहीं हरपल को जी लेते हैं रिश्ते
जाने कैसे-कैसे होते हैं ये रिश्ते
समझने की जितनी कोशिश करती हूं
उतने ही उलझते जाते हैं ये रिश्ते............

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