संबलपुर, जिला-कांकेर, (छ. ग.)
विषय-कृषक(विशेषोक्ति अलंकार का प्रयोग)
*कृषक*
सावन की वर्षा से
जल थल भर जाएं,
प्रेम भरी अंसूवन से
हर नयन भर जाएं।
मैं ऐसी विरहन बिन
नीर के मर जाऊँ,
नैनों भरी नीर मुझे
पिय की हरदम याद दिलाएं।
गर्जन,तर्जन और
जग भरा है क्रंदन से,
मगर हिय में मेरे
केवल सूनापन ही समाएं।
मैं सजनी,अनुगामिनी हूँ,
पिय से मिल जाऊँ,
पिय से मिल कर भी विरह
दग्ध ज्वाला से जल जाऊँ।
चंचल,चितवन बाँकी
नैनन छाया तमस अपार,
स्याह तिमिर भरे अमावसी मन में
कल्पित उजास हो साकार।
*विशेषोक्ति अलंकार का प्रयोग*
1गर्जन तर्जन और जग भरा क्रंदन से,मगर हिय में सूनापन ही समाएं
2.पिय संग रहकर भी विदग्ध ज्वाला में जल से जल जाऊँ।
3चंचल,चितवन बाँकी नैनन में छाया तमस अपार।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,( छ. ग.)
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