Monday, September 28, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि " की रचना- किसान

  विषय _कृषक
  रचनाकार _ सावित्री यादव "सावि "
                   बिलासपुर छ. ग. 
                  
                   
शीर्षक_ मैं  किसान हूँ |

 मैं किसान  हूँ |


रोज बड़े सबेरे उठ अपना कार्य मैं करता हूँ |
सबके लिए अन्न  उगाने मे जुट जाता हूँ |
मुझसे ही आस लगाए दुनिया भोजन के लिए |
और मैं उठ जाता हूँ भोजन  जुटाने के लिए | 
मैं किसान  हूँ ||1||

मेरे चेहरे की हंसी ख़ुशी मौसम पर निर्भर  करता है |
और मेरी  मेहनत देख ईश्वर  भी खुश होता है |
लहलहाते  खेत ही मेरी जन्नत है |
उनको देख ही मैं  मुस्कुराता  हूँ |
मैं किसान हूँ ||2||


अपने बच्चों को भर पेट भोजन मिले
इस कारण नित दिन कठिन परिश्रम  को लगता गले 
मैं ना  फ़सल उगाउँ तो पड़   जाये दाने के लाले 
कनक ऊगा  कर  कनक का मिलता नहीं तोल 
फिर भी नहीं मिलता मुझे अपने मेहनत का सही मोल 
मैं किसान हूँ ||3||


ज़ब बारिश ना होती है तो आंखे  बरस जाती है मेरी |
ज़ब फसले बिगड़ती  है तबियत बिगड जाती है मेरी |
मैं अपनी व्यथा  किससे कंहू कोई  समझे तो दशा  मेरी |
कुदाल फावड़ा  ही मेरे किस्मत  लिखने वाले कलम 
मैं ही जानता हूँ अपने दुख का मरम 
मैं किसान हूँ ||4||


मैं चाहता हूँ की मेरे  बच्चे भूखे ना रहे |
समाज  के लोग  भूखा ना सोये |
कोई  अन्न को ना तरसे बस यही सोच मैं रखता हूँ |
बस इस कारण मैं दिन रात मेहनत करता  हूँ |
मैं किसान  हूँ ||5||

इसलिए शास्त्री जी ने कहा है |
जय जवान | जो देश की रक्षा  करे |
जय  किसान | जो अन्न उगाकर |
सबका पेट भरे |
मेरे मन की इच्छा है | कहे ये किसान 
अन्न  धन से हमेशा  रहे|
मेरा भारत सामर्थ वान 
मैं  किसान  हूँ ||6||
 


भावर्थ  - किसान  अपने मन की बात कह रहा  है |
  रचनाकार  - सावित्री  यादव
 बिलासपुर  छ. ग. 
                      

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