Monday, September 28, 2020

सुकमा से गावस्कर कौशिक की रचना- कृषक

रचनाकार- गावस्कर कौशिक
जिला - सुकमा, छत्तीसगढ़
विषय- कृषक

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बंजर भूमि उपजाऊ बनाते,
 स्वेद रक्त से अपने  सींच
ज्यों वृक्ष बादल से जल को, 
धरा पर ले आते हैं  खींच

सारे जग की उदर  भरते, 
खुद रहते हैं भूखे प्यासे
अन्नदाता कहलाते है वो, 
अन्न की एक दाना को तरसे

जेठ की ताप से धरती तिपे,
 तिपते नहीं किसान के तन
सावन भादों घनघोर बरसे, 
भीगते नहीं कभी इनके तन

पूस की कड़कड़ाती ठंड से, 
जहाँ तन बदन सब कड़के
ठंड की स्वागत करने को ,
वे जाते खेत भोर में तड़के

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   गावस्कर कौशिक
    सुकमा, छ्ग

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