Monday, September 28, 2020

रायगढ़ से मनोरमा पटनायक की रचना- कृषक

रचनाकार :- मनोरमा पटनायक 
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
 वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा 
विषय :- कृषक   
विधा  :- कविता (मुक्त छंद )
अलंकार :- विशेषोक्ति अलंकार

भारत माँ का सच्चा सपूत ,
कर्तव्य निष्ठ किसान है |
वसुधा जिससे प्रफुल्लित ,
हरित परिधान है |
मेहनत जिसका मात्र लक्ष ,
कर्म प्रधान है |
पालनहार जग का कृषक 
महान है |

परतु आज उस कृषक 
की अवस्था बड़ी दुखदायी है |
परिश्रम असफल हो रहा 
भारी पड़ी  महंगाई है |
खुद भूखा दुखी है जो सबके
 सुख का अनुयायी है |
कर्ज में डूबा बेहाल है 
कैसी विपदा आई है |

दिन न बीते बिन परिश्रम 
आराम का कोई शाम नहीं |
खुद भूखे रह जाते पर निराशा
 का कोई नाम नहीं |
सुखी धरती सोना उगले 
असंभव सा कोई काम नहीं |
तुम अन्न दाता हो सबके 
अनमोल तुम्हारा दाम नहीं |
जीत न सको बाहुबल से 
ऐसा कोई संग्राम नहीं |
धरती तनय तुम सृजनकार 
कृषक से बढ़कर कोई सम्मान नहीं |

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