पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विषय :- कृषक
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
अलंकार :- विशेषोक्ति अलंकार
भारत माँ का सच्चा सपूत ,
कर्तव्य निष्ठ किसान है |
वसुधा जिससे प्रफुल्लित ,
हरित परिधान है |
मेहनत जिसका मात्र लक्ष ,
कर्म प्रधान है |
पालनहार जग का कृषक
महान है |
परतु आज उस कृषक
की अवस्था बड़ी दुखदायी है |
परिश्रम असफल हो रहा
भारी पड़ी महंगाई है |
खुद भूखा दुखी है जो सबके
सुख का अनुयायी है |
कर्ज में डूबा बेहाल है
कैसी विपदा आई है |
दिन न बीते बिन परिश्रम
आराम का कोई शाम नहीं |
खुद भूखे रह जाते पर निराशा
का कोई नाम नहीं |
सुखी धरती सोना उगले
असंभव सा कोई काम नहीं |
तुम अन्न दाता हो सबके
अनमोल तुम्हारा दाम नहीं |
जीत न सको बाहुबल से
ऐसा कोई संग्राम नहीं |
धरती तनय तुम सृजनकार
कृषक से बढ़कर कोई सम्मान नहीं |
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