पता -------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय------ भय ग्रस्त मन
शीर्षक ---- थोड़ा सा कब्रिस्तान बाकी है .....
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अभी तो शुरुआत है , पूरा इम्तिहान बाकी है !
देखना है कितनों का , इमान बाकी है !
इंसानों की बस्ती में गया था इंसा ढूंढने ,
ताज्जुब है , सिर्फ चंद इंसान बाकी है !
टूटेगा अपने - परायों का गरूर अब तो ,
चेहरे में छुपे चेहरों की , पहचान बाकी है !
घुला हुआ है ज़हर , हवाओं में हर तरफ ,
न जमीं , न आसमान बाकी है !
मौत से यारी कर तो लो मगर ,
याद रहे , थोड़ा - सा कब्रिस्तान बाकी है !
पूछ लिया करो अपनों का हाल कभी -कभी,
न जाने किसमें , कितना जान बाकी है !
कब तक बोओगे बीज नफरत के अपने दामन में ,
बंजर हुआ सारा चमन , न बागबान बाकी है !
चलो देखते हैं किसके खूं में कितना रवानी है ,
जिंदा है जमीर किसका ,किसका स्वाभिमान बाकी है !
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