Tuesday, September 29, 2020

चेतन सिंह क्षत्रिय की रचना- थोड़ा सा कब्रिस्तान बाकी है

रचनाकार -- चेतन सिंह क्षत्रिय
पता -------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय------ भय ग्रस्त मन
शीर्षक ---- थोड़ा सा कब्रिस्तान बाकी है .....
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अभी   तो   शुरुआत  है , पूरा  इम्तिहान   बाकी है !
देखना     है   कितनों   का ,        इमान   बाकी  है !

इंसानों    की  बस्ती   में     गया    था  इंसा  ढूंढने , 
ताज्जुब   है ,       सिर्फ     चंद   इंसान  बाकी   है !

टूटेगा     अपने - परायों      का    गरूर  अब  तो , 
चेहरे       में  छुपे   चेहरों  की ,   पहचान बाकी है !

घुला      हुआ   है  ज़हर  ,  हवाओं  में  हर   तरफ , 
न           जमीं ,          न   आसमान    बाकी   है !

मौत            से      यारी      कर     तो  लो   मगर ,
याद    रहे   ,  थोड़ा - सा   कब्रिस्तान   बाकी   है !

पूछ    लिया   करो    अपनों  का हाल कभी -कभी,
न   जाने     किसमें ,    कितना     जान    बाकी है !

कब तक बोओगे बीज नफरत के अपने दामन में ,
बंजर   हुआ सारा चमन ,     न   बागबान बाकी है !

चलो   देखते  हैं    किसके    खूं में कितना रवानी है ,
जिंदा है जमीर किसका ,किसका स्वाभिमान बाकी है !

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