रचनाकार-एच-एस-अरमो,अरमान ।
निवासी-बैरन-बाज़ार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक:-""शहीद भगत सिंह """ ।
विधा:-छ्न्द-मुक्त,कविता ।
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==$$$=="शहीद भगत सिंह "=$$=
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भगत-तुम तो थे "सिंह"--
जीये भी "सिंह" के समान,
मरे भी तो "सिंह" के समान,
याद करेगी,तुम्हारी शहादत,
ये धरती,ये मातृभूमि ।।
मरकर भी,अमर हुये---
जवाँ दिलों के बने, सरताज ,
जाबान्जों-सा ,जीने का सबक सीखाया,
मौत के साये में भी--
देशभक्ति की जलायी मशाल ।।
सब वो बातें,तुममें थी---
स्वराज दिलाने की ,
आओ हम-तुम मिलकर,करेंगे,
तुम्हारे कारनामें को करते,सलाम,
तुम,मरकर भी,जीते रहोगे---
हम सबके,दिलों में,रहोगे सदा ।।
रहेगी सदा,अमर-शहीद---
वाली,यादें,तुम्हारी सदा ,
यही आवाज़ें,उठतीं रहें ,
"इंकलाब- ज़िन्दाबाद "
"इंकलाब ज़िन्दाबाद " ।।
"""""""""""•••••••••••••••••""""""""""""""व्याख्या:-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि दिनांक 27सितंबर को--शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हमारी ओर से भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।ताकि आने वाली पीढ़ी को उनकी अमर बलिदानी याद रहे ।
===स्वरचित-प्रस्तुति-एच-एस-अरमो
"अरमान "रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
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