Wednesday, September 30, 2020

पुष्पा पटनायक की रचना- हिंदुस्तान

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक -"पैगाम ए हिंदुस्तान"
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यह चमन हमारा है ,यह गगन हमारा है 
अरे ! चीन  देख अब ,पतन  तुम्हारा  है ।

सोचना भी मत, आंख उठाने की इस तरफ 
वतन सरफरोशी  की,तमन्ना अब  हमारा  है ।

आंख निकाल कर, रख देंगे हाथों में तुम्हारे 
मत समझना मकसद, सिर्फ धमकाना हमारा है ।

हकीकत से रूबरू, हो  भी  जाओ चीनियों 
लैक  के  इस  तरफ, पूरा  भारत  हमारा  है ।

1962 का  युद्ध,  तनिक भी याद  नहीं तुझे 
भूल  कैसे  गया ,  थोड़ा  फिर  याद  कर  ले ।

जो याद ना आ रहा हो, फिर दो-दो हाथ कर ले 
और जब पस्त, होने लगे तेरे हौसले ।

तो मेरे भारत से , दोबारा फरियाद कर ले 
विशाल हृदय रखता है, मेरा भारत सब के लिए।

बक्श   देगा  तुझे  तेरी  ख़ता  के  लिए 
पैरों तले नाक रगड़ने,  खुद को तैयार कर ले ।

यह चमन हमारा है, यह गगन हमारा  है 
अरे ! चीन  देख,  अब  पतन  तुम्हारा है ।
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