स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक -"पैगाम ए हिंदुस्तान"
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यह चमन हमारा है ,यह गगन हमारा है
अरे ! चीन देख अब ,पतन तुम्हारा है ।
सोचना भी मत, आंख उठाने की इस तरफ
वतन सरफरोशी की,तमन्ना अब हमारा है ।
आंख निकाल कर, रख देंगे हाथों में तुम्हारे
मत समझना मकसद, सिर्फ धमकाना हमारा है ।
हकीकत से रूबरू, हो भी जाओ चीनियों
लैक के इस तरफ, पूरा भारत हमारा है ।
1962 का युद्ध, तनिक भी याद नहीं तुझे
भूल कैसे गया , थोड़ा फिर याद कर ले ।
जो याद ना आ रहा हो, फिर दो-दो हाथ कर ले
और जब पस्त, होने लगे तेरे हौसले ।
तो मेरे भारत से , दोबारा फरियाद कर ले
विशाल हृदय रखता है, मेरा भारत सब के लिए।
बक्श देगा तुझे तेरी ख़ता के लिए
पैरों तले नाक रगड़ने, खुद को तैयार कर ले ।
यह चमन हमारा है, यह गगन हमारा है
अरे ! चीन देख, अब पतन तुम्हारा है ।
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