पता-------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विधा --- ग़ज़ल/कविता
शीर्षक--- गुलाब बोता क्यों है ??
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बेशुमार सपने , संजोता क्यों है ?
टूटा इक सपना , तो रोता क्यों है ?
कांटों से डर है अगर ,
तो फिर गुलाब , बोता क्यों है ?
राहें आसां न होगी ये तय है ,
हजारों ख्वाहिशें , पिरोता क्यों है ?
सहता जा , हर दर्दे - जख्म ,
अश्कों में खुद को , डुबोता क्यों है ?
कर प्रतिज्ञा जीत की , और बढ़ आगे,
मिलेगी कामयाबी , निराश होता क्यों है ?
जो चला गया , वापस न आएगा ,
ये वक्त है बेशकीमती , खोता क्यों है ?
एक कठिन डगर है जिंदगी ,
चलता चल मुसाफिर ,हताश होता क्यों है ?
आएगी मंजिल तेरी कदमों में ,
रख धीरज , बदहवास होता क्यों है ?
आंधियों में भी जलेगा दिया तेरा ,
कर कोशिश , विश्वास खोता क्यों है ?
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