विषय-प्राकृतिक आपदा
शीर्षक-जीवन में भूकंप
अलंकार-संदेह अलंकार
विधा-कविता ( मुक्त छंद)
जीवन के केनवास पर
बहुत ही सुन्दर चित्र
बनते रहते हैं तभी
अचानक जीवन में
भूकंप आ जाता है।
शैलाब भावनाओं का
ले डूबता है मन के
दरवाजे पर दस्तक दे
भूकंप उधेड़ देता है
भावनाओं की छतरी।
फिर तितर -बितर हो
जाते हैं जीवन की
बगिया के वो फूल
जिनके खिलने के लिए
बरसों करता है इंतजार।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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संदेह अलंकार-
1-जीवन में भूकंप।
2-भावनाओं की छतरी
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