Friday, September 4, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- पतित प्रेम

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (उदाहरण अलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"पतित प्रेम"
***********************
प्रेम अब  साधना नहीं  साधन  हो गया 
जैसे आंखों में काजल नहीं सुरमा चढ़ गया ।

बात अब  प्यार  की  रह  ही  नहीं  गई
जैसे मानों  कमाई  का  जरिया  हो  गया   ।

सात जन्मों की कसमें अब  कहीं  नहीं 
बात-बात में अब तो तलाकनामा हो  गया  ।

खत पढ़  सहेज  कर  रखते  थे  कभी 
मोबाइल में अब तो डिलीट मारना आ गया ।

प्यार दिलों को जोड़ा करती थी  कभी
अब तो जैसे शरीर तक सिमट कर रह गया ।

जज्बात आंखों से बयां होते थे  कभी 
अब तो जैसे मुंह मारने का चलन हो गया   ।

कुछ ना ही कहे पुष्पा अब तो अच्छा है
बहुत  कुछ  तो  जुबान  पर  आ  ही  गया  ।
------------------------------------

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...