Tuesday, September 29, 2020

एच-एस-अरमो की रचना- घटनाक्रम

रचनाकार:-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवासी-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
जिला-रायपुर ।
विषय:-भयग्रस्त मन ।
शीर्षक:-घटनाक्रम ।
विधा:-अतिश्योक्ति अलंकार ।
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""":::::""""घटनाक्रम """""::::::""""""
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परिवारों से ही,समाज बना ---
सहयोग-सहकारिता,आपस में जगा,
निर्भय रहती है,जिन्दगी सबकी,
आपसी मेलजोल से ही,तालमेल जागा ।
जीवन की आपाधापी ने---
एकाकीपन,है लाया जिंदगी में,
अजनबी शहर में,अनजान हैं लोग,
भयग्रस्त मन को हवा जो देता ।

महामारी के दौर में---
अपने भी,पराये नजर आते हैं ।
चेहरे में मास्क,सामाजिक दूरी की बात 
खुद को,जिन्दा रखने---
भयग्रस्त मन से,सब जीये जा रहे हैं ।

डर से भय और भय से भूत---
को,हमने,जबरन ही,पाल रखा है ।
आत्मविश्वास व सकारत्मक सोच--
के सामने,सब,दूर रहते हैं ।

किसी अप्रिय घटना से,आशन्कित मन
उस राह,न चलने को,कहता मन,
पर,साहस-जोखिम के सहारे---
कर जाते,अक्सर,इसको दूर हम।

मानव ने,अपने हासिल ज्ञान से --
धरती-आकाश को,एक कर दिया ,
भयग्रस्त मन के लोग,डरते रहे---
और साहसी लोग,अजूबा करते रहे।

परीक्षार्थी, परीक्षा से----
अक्सर,भयग्रस्त हो जाता,
अध्ययन की,गूढता रहते हुऐ भी,
वो,अक्सर,डर जाता है ।
आत्मविश्वासी,साहसी लोग---
अपने,परीक्षा परिणाम को,
अपने हक में,कर लेते हैं ।

हाथी होता है,कितना बलशाली---
चिटियों से,है वह डरता---
भयग्रस्त मन से ,वह ---
जमीन में,फूंक -फूंककर ----
रखता है,वह अपना हर एक कदम।

टार्च की रोशनी में---
अकेले-घुप अँधेरे में,वो--
आगे,बेखौफ़ बढ़ता ही गया ,
भयग्रस्त मन के कारण,डरता ही रहा,
पर,टार्च की रोशनी,आगे बढ़ने का,
मात्र हौंसला और ताकत देती है ।
========इति ============
**स्वरचित-प्रस्तुति-एच-एस-अरमो *
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