Thursday, September 17, 2020

लीलाधर कुम्हार कृत आलेख- जीवन और वर्तमान

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ . ग . )
विषय - जीवन और वर्तमान की चुनौतियाँ
विधा - आलेख 
 शीर्षक -  जीवन एक संघर्ष

          मनुष्य जीवन चुनौतियों से भरा एक संघर्ष है । जन्म से मृत्यु तक प्रकृति की कठोर परिस्थितियों से लड़ना हमारी नियति बन गई है । किन्तु वर्तमान में स्वनिर्मित समस्याएँ भी उलझन में डाल देती हैं । हर प्रकार की वैज्ञानिक सुख - सुविधा के बाद भी हम परेशान हैं , दुःखी हैं । आखिर वे चुनैतियाँ कौन - कौन सी हैं जो हमें वर्तमान में लड़ने पर मजबूर कर रही हैं । कुछ चुनौतियों पर दृष्टिपात करते हैं जो क्रमशः इस प्रकार है -
1- बेरोजगारी
2- निर्धनता
3 - मँहगाई
4- कोरोना महामारी
5 - मानसिक व वैचारिक प्रदूषण
         वैसे तो और भी कई समस्याएँ हैं किन्तु वर्तमान में ये पाँच प्रमुख हैं । इस कोरोना काल मे बेरोजगारी में भारी वृद्धि हुई है । गाँव के किसान व मजदूर काम - धंधे से वंचित हो गये । तो रोजगार नहीं मिलना एक चुनौति बन गया है जिसके कारण गरीबी बढ़ रही है । अभी आम जनता नमक - मिर्च में खाने को विवश हैं । कोरोना के कारण कहीं काम नहीं मिल रहा है तो बेचारे ठीक से रोजी - रोटी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं । चीज - वस्तुओँ के दाम  आसमान छू रहे हैं । माँग ज्यादा है और पूर्ति कम है । इसीलिए महँगाई अनियंत्रित  हो गई है और लोग बेचारे पीड़ित हो रहे हैं ।
         सबसे बड़ी चुनौती कोरोना है जो सम्पूर्ण विश्व को निगल चुकी है । अमेरिका , इटली , ब्राजील जैसे विकसित राष्ट्रों की कमर टूट चुकी है । वैज्ञानिक औऱ डॉक्टर भी बीमारी के रहस्य को समझ नहीं पा रहे हैं । अभी तक कोई भी वैक्सीन या टीका जो सौ प्रतिशत काम करे, नही बन पाया है । हमारे शास्त्रों में तो जन्म- व्याधि- जरा -मृत्यु ये शारीरिक गुण-धर्म दोष पहले से ही वर्णित है । अतः कोरोना की वजह से आज जीवन का पूरा सिस्टम ही बदल गया है ।
        समस्त चुनौतियों में भयावह व विकराल चुनौती मानसिक विकृति व विचार प्रदूषण  है ।  चिंता , तनाव , अनिद्रा , बुद्धि की मंदता व पागलपन सामान्य हो गया है । अनपढ़ ,पठित , गरीब ,अमीर या कहें पूरा मानव समुदाय मन से , वाणी से , विचार से व कर्म से कहीं न कहीं अपूर्ण हैं , प्रदूषित हैं । केवल शिक्षा ही सब कुछ नहीं है । नैतिकता , संस्कार , शास्त्र ज्ञान एवं संतों की दीक्षा के बिना ये संभव नहीं है । मन की शन्ति व विचार की पवित्रता बहुत बड़ी उपलब्धि है । झूठ,छल,कपट,निंदा,स्वार्थ ,अहं ,मोह आदि हमारे मन की ऐसी आधि है जो जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ती ।  सुख और सुविधा अलग बात है किंतु वैचारिक शुद्धता व मन की शांति निराली है ।
            सारांश यही है कि इन सारी चुनैतियों से जूझते हुए जीवन पथ पर हमे आगे बढ़ना है । चुनौती का दूसरा नाम ही जिंदगी है । कहा गया है - ' वीरभोग्या वसुंधरा ।'  संघर्ष ही जीवन है और जीवन ही संघर्ष है ।
 
चुनैतियों की बाढ़ है ,

                जीवन में भरपूर ।

तो भी मत घबराइये ,

              मुकाबला  भरपूर ।।

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