जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ़
विधा- कविता (संदेह अलंकार पर आधारित )
शीर्षक --तूफान
व्याख्या ---कवि के द्वारा तूफान के आने परमानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव एवं तबाही का वर्णन किया गया है प्राकृतिक आपदा कई बार आती है उससे निपटने के लिए कोई भी मनुष्य तैयार नहीं रहता इसमें जन धन शिक्षा सभी इसके दुष्परिणाम से प्रभावित होते हैं । कोई भी आपदा जीवन में न आये इसके लिए जग नियंता से प्रार्थना करते रहते हैं ।कभी कभी इसका प्रभाव अल्प होता है । जिसे मनुष्य चुपचाप सहन कर लेता है । कभी सम्पूर्ण स्वप्न ही बिखर जाते हैं धरे के धरे रह जाते हैं । प्राकृतिक आपदा कभी न आये कहकर कवि से विनय भी किया गया है ।
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तूफान
आया तूफान घर तोड़ दिया,या यह नया बनायेगा ।
लेगा खुद पर जिम्मेदारी,या यह आरोप लगायेगा ।
लाखों टूट गए हैं पेड़,या जंगल वह वृहद बनायेगा ।
सपना टूटेंगे या जुड़ेंगे,यह सवाल कौन समझायेगा ।
घर मलवा में तब्दील हुआ, जीना सबका मुश्किल हुआ ।
ईश्वर से मांगते सब दुआ,सुलझायेगा या यह उलझायेगा ।
अभी अब हम बेघर हुए या नव आलीशान भवन बनायेगा ।
सपना सच होगा या झूठ, जीवन रोयेगा या मुस्कुरायेगा ।
हम घोर अन्धकार में है,या उजाला हमारा जगमगायेगा ।
हम सोच रहे दीपावली,या एक दीप भी न जल पायेगा ।
भाग्य रुठा या बन रहा,जीवन हर पल भीड़ या निरजन रहा
समस्याएं घट रहे या बढ़ रहे, उलझनअपनाये या ठुकरायेगा
तुफानों से एक नहीं हजारों , अनगिनत नुकसान हुए हैं ।
किसी के लिए श्राप और, किसी के लिए वरदान हुए हैं ।
घर में तूफान से तबाही, या उसको खुशियों का ढ़ेर कहूं ।
अव्यस्था और अभाव के कारण ,सबको हेर फेर कहूं ।
कृष्ण की जहां बजती थीं बंशी,कंस का अखाड़ा लग रहा ।
शांत हैं सब लोग या आपस में ,कुछ बात लेकर लड़ रहा ।
तूफान जहर हुआ या अमृत , बहुत ही सोच रहा इंसान ।
तुम्हारा जो भी हो प्रभाव ,फिर कदम मत रखना श्री मान ।
गिरधारी लाल चौहान
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