Wednesday, September 30, 2020

रवि नारायण की रचना चल सको

रचनाकार का नाम- रवि नारायण 
जिला -रायगढ़, छत्तीसगढ़ 
विधा- गीत
शीर्षक " चल सको  " 

चल सको तुम.. दो कदम साथ में 
                       जलती पावक भी जलधार हो जायेगा , 
और मुँह को यूं ना मोड़ो तुम 
                                    सच कहता हूं प्यार हो जायेगा ,,   चल सको तुम..  
                           
 प्यासा चातक सा निहारा हुआ 
                               स्वाति बन के तुम बरष दो जरा , 
मन की बगिया जली मरूथल की तरह 
                             प्रेम कि बूंदो से कर दो हरा ,, 
और देखो जो तुम मेरी नजर में 
ये पतझड़ भी बहार हो जायेगा ,, चल सको...              

यज्ञ बन जाऊं में दक्षिणा तुम बनो 
                               आवो मिल के तुम जो हवन कर लें , 
दशा कैसी भी हो एक रहेंगे सदा  
                                  हाथ में हाथ लेकर मन कर लें ,, 
और देखें जो हम सपने कई वो सपना भी साकार हो जायेगा ,, चल सको .. 

चांद पूनम का जब भी देखे चकोर 
                                  चांदनी बादलों में शरमा गयी , 
सर्द रातों में जब चले जो हवा  
                                      लगे ऐसा की दोपहर आ गयी ,, 
और जी ले कुछ अनजिये पल को
 वरना मौसम भी पार हो जायेगा ,, चल सको..


रवि नारायण रायगढ़ छत्तीसगढ़

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