जिला - रायगढ़
विषय- भयग्रस्त मन
शीर्षक- जीवन की राह में,,,,,,,
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जीवन की राह में,
हर मानव की आस
आंखो में तू सपना सजाकर
दिल में लेकर बैठा क्यों है।
राह पर पग को चलने दो
दीप हमेशा तू जलने दे,
चाहे राह पर काँटे हो
खुद में तुझको धैर्य है रखना।
जीवन की लीला है ये प्यारी
इसी में लगती दुनिया न्यारी,
मन इतना बेचैन तू क्यों है
इस दुनिया में तू खोया क्यों है।
कभी ना थकना कभी ना रुकना
जीवन भर तू यूँ ही चलना,
मंजिल जरूर मिलेगी
मन में जीत का गीत रखना
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