रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - नदी
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - नदी
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// नदी //
नदी एक संस्कृति है ,
सभ्यता है ।
धरती पर
अमृतमय जलपान कराने वाली
माँ है ।
नदी एक आस्था है ,
श्रद्धा है , तीर्थ है ,
पूजा है , धर्म है ।
रोक - टोक व कष्टों से जूझती
सतत प्रवाहमान नदी
स्वयं एक उदाहरण है
परोपकार , सेवा और त्याग का ।
वह गुणों की खान है ,
स्चच्छता व पवित्रता का प्रतीक है,
भाव भरा अलौकिक संगीत है ।
विचारों , मान्यताओं व परम्पराओं का
संगम है नदी ,
भूत भविष्य एवं वर्तमान की
त्रिवेणी है नदी ।
सच कहूँ तो ,
इस सृष्टि में
सभी जीवधारियों का जीवन है
नदी ।
निरन्तर व सस्वर
प्रवाहित होती है नदी
प्रेम मे पगी व्याकुलता के साथ
अपने आधार , मूल व उद्गम
जीवनदाता सागर से
एकाकार होने को ।
वह मनुष्य की भाँति
अपने आधार , मूल व उद्गम
जीवनदाता ( परमात्मा ) को
भूलती नहीं ।
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