रचनाकार :- मनोरमा पटनायक
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विषय :- नदी
विधा :- कविता (मुक्त )
मचलती उछलती लेके अपनी रवानी |
नदी मैं नदी हूँ सागर दीवानी |
न थकना जानू , न रुकना जानू |
अपनी ही मौज में बहना मैं जानू |
अमिट , अनवरत है मेरी कहानी |
नदी मैं नदी हूँ सागर दीवानी |
प्यास बुझाती सभी की मैं ,सागर की मुझको प्यास है |
फिरती राहों में बैचैन मैं , मंजिल की मुझको तलाश है |
मन में लिए लाखों उम्मीदें , मिलन का मुझको विश्वास है |
ऊँची नीची राहों पर कठिनाइयों
का आभास है |
हौसले और संघर्ष भरी मेरी जिंदगानी |
नदी मैं नदी हूँ सागर दीवानी |
जहाँ भी जाती हूँ खुशहाली लाती हूँ |
हरियाली देकर वसुंधरा स्वर्ग बनाती हूँ |
सबके मैल धोकर पापनाशिनी कहलाती हूँ |
हूँ संतों की देवी मैं सभ्यता बसाती हूँ |
सागर न होगा मीठा मुझसे मिल फिर भी प्रेम लुटाती हूँ |
परोपकार धर्म मेरा ,प्रेम रीती मेरी पुरानी |
नदी मैं नदी हूँ सागर दीवानी |
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