Monday, September 21, 2020

डॉ ओमकार साहू"मृदुल"जी की रचना- हमारी नदियाँ

रचनाकार डॉ ओमकार साहू "मृदुल"
जिला    सूरजपुर
शीर्षक-  हमारी नदियाँ
विधा    पञ्चचामर छंद
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*सरोजनी खिला रही, कबीर बीच धार में।*
*नदी कृपा दुलारती, उधो कृपा विचार में।।*

सुशैलजा बहे जहाँ, जलोढ़ के निशान हैं।
कछार धन से सजे, समेटता किसान है।
प्रभात द्वार खोलती,सुभान का विहान दे।
नदी बहे विभाग में,सुभेद वेद ज्ञान दे।

*सनेह नीर भाव के, सुभारती पखार में...*
*नदी कृपा दुलारती, उधो कृपा विचार में।।*

प्रवाह वेग क्रोध में, विराट रूप जो धरे।
डरावनी विनाशनी, कुभाव बाढ़ से डरे।
असंख्य को बहा चली,अकाल मौत से मरे।
विशाल द्वार तोड़ दे, प्रचंड काल जो करे।

*सहेज शैलजा सभी, नदी कहे पुकार में...*
*नदी कृपा दुलारती, उधो कृपा विचार में।।*

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