Tuesday, September 1, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- वनांचल में शिक्षा

रचनाकार--एच-एस-अरमो "अरमान "
निवासी-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक-वनांचल में शिक्षा-दीप ।
विधा-कविता ।
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   !!!!|||••वनांचल में शिक्षा-दीप••||!!!!
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हम हैं,सुदूर वनांचल के---
सीधे-साधे,भोले-भाले बच्चे --।

जीवन पथ के,संघर्षों में,
मिलता है ,सुख किसी को,
तो मिलता दुःख ही दुःख किसी को ।

मिले अभावों में भी सहारा,
भटके को भी,मिले सही किनारा,
अनाथों को भी,मिले बेशक सहारा,
वनांचल तक भी पहुँचे ऐसा उजियारा,
होए न कभी भी,उनके जीवन में अँधियारा ।

हैं वो यारों,एक टिमटिमाते दीप,
गरीब के घर में,रोशनी है फैलाते,
कभी जुगनु तो,कभी सितारा बन के,
कभी दीप,बन जाते हैं,जलते अंगारे ।

वनांचल में,कैसा फैला है,ज्ञान का,
विज्ञान का,अन्धविश्वासों का घोर अँधेरा,
भूखमरी,बेबसी,मजदूरों की है भारी,
फिर भी,शासन की योजना व नीतियों से,
खुली आँगनबाड़ी केन्द्रों का लाभ,
उठा रहे हैं,वनांचल के अब लोग,
बच्चों को ज्ञान के साथ,मिलता पौष्टिक आहार और स्वस्थता की बातें,
शिक्षा की पहली सीढ़ी की शुरुआतें ।

मिले ज्ञान की रोशनी ऐसी,
जैसे अन्धे को,मिले कोई सहारा ।
प्रौढ़ शिक्षा,औपचारिक शिक्षा,ओपन- स्कूल ,जैसी -सुविधा से मिटा अँधेरा ।

मोबाईल ज्ञान-सुविधा ने बना दिया है,
उनको ज्ञानशील व समझदार,
शिक्षा का ऐसा अलख जगा है,
पहुँच रही,पढ़ाई,उनके द्वार है ।

वनांचल में हुआ,जबसे शिक्षा का उजाला,
हक-अधिकार,जीवन शैली में विस्तार,
स्व-सहायता समूह गठन एवं सशक्तिकरण,महिलाओं का बना ठोस सहारा ।

पंचायती राज को सबलता मिली,
गाँव की काया में हुई तब्दीली ।
वनांचल से,कुछ बहुमूल्य हीरे निकले,
कुछ कलाकार,शिल्पी और पढ़य्या निकले ।
कुछ ने पा ली नौकरी और कोई करे धंधा,
मनरेगा का,ज्ञान से लाभ उठाया,
गाँव से,पलायन को कम कराया ।
बाल-विवाह,भ्रूण हत्या,टोनही प्रथा,
जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगा दी,
ये चमत्कार,शिक्षा ने कर दिखाया ।

आओ वनांचल में,शिक्षा-दीप जलायें,
ऐसा कार्यक्रम व सामाजिक सरोकार फैलायें,
एक दीप से,कई दीप जलायें 
अज्ञानता के अन्धेरे को दूर भगायें।
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व्याख्या-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि वनांचल में शिक्षा का अलख जगाने की जरूरत है और हम सबको इसके महत्व को बताने की जरूरत है
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