स्थान-लैलूंगा रायगढ़
विधा -कविता
शीर्षक -"कृषक"
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चाहे आगी बरसे चाहे पानी,
चाहे खर्राटे आवे चाहे सुनामी
दिन रात हाड़ा घोरइया
मेहनत करना मोर बानी।
सबके पेट भरोइया
मैं करतीं खेती किसानी,
गीता के करमवाद के पुजारीओं
दुनिया के सब ले बड़खा जुआरीओं।
बीज ला बोथं हर बरस बोथं
चाहे जामा चाहे भथाएं,
किंतु देथँ,राखड देथँ
उपजे झन उपजे चाहे माहुं खाएं।
बीरता ला लूथँ आऊ लुबेच करिह
चाहे बदरा हावे चाहे सार,
बीज ला बोथं हर बरस बोथं
चाहे कारा बरसे चाहे पानी।
ऐसन दाॅव लगोइया
मैं करथों खेती किसानी,
मोर नाव होवे घनश्याम पटेल
मैं करथों खेती किसानी।।
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