Monday, September 28, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- कृषक

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान - दुर्ग (छ.ग.)
विधा- मुक्त ,विशेषोक्ति अलंकार
शीर्षक-  कृषक का जीवन

आनंदित होता वह कृषक
लहलहाते फसल को देख
अपनी कड़ी मेहनत का साथी
 बैंलों को निहारता प्रेम से ।

      चिलचिलाती धूप हो या
      कँपकँपाती ठंडी, या हो
      मूसलाधार वर्षा, श्रम
      लगातार वह करता ।

भरपूर अनाज उपजाता
उत्साहित सदा वह रहता
अपनी मेहनत का फल. 
पाकर गीत खुशी के गाता ।
 
  इतनी पूंजी होकर भी,दो 
  वक्त की रोटी को तरसता
  भौतिक सुविधाओं से दूर
  सादा जीवन वह बिताता ।।

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