स्थान- कचंदा
जिला- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा- कविता (अतिशयोक्ति अलंकार)
शीर्षक-
कोरोना का भय
कोरोना का भय
मन में दुःख समाया , सुनकर नाम कोरोना ।
रोग कहीं न लग जाए, जीवन पड़े न खोना ।
जीवन पड़े न खोना, युवक हुआ भयभीत।
बिन संपर्क में आये ही, हो गया संक्रमित।
कह "प्रधान" कविराय, लक्षण दिखे तन में ।
मर न जाउं कहीं, भय समाया उसके मन में ।
टीप-- प्रस्तुत कविता में अतिश्योक्ति अलंकार प्रयुक्त हुआ है युवक कोरोना के भय से ही बिना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए संक्रमित हो जाता है ।
No comments:
Post a Comment