जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा-उदाहरण अलंकार
विषय-भ्रमर
शीर्षक- "मकरंद"
**************************
मन है मनस्वी ढूंढे आनंद,
ज्यों तलाश भ्रमर की मकरंद ।
जग निकुंज बन निहार रहा,
मन चोर है निश्छल निराक्रंद ।।
मन है मनस्वी ढूंढे आनंद,
ज्यों तलाश भ्रमर की मकरंद.....
परमधाम परमसुख में सच्चिदानंद,
धारिणी-धरित्री की प्यास बुझाए घनानंद ।
ये काले मेघ यूॅं न नाद करेंगे,
जरा भावनाओं से तीव्र हो चाक-चौबंद ।।
मन है मनस्वी ढूंढे आनंद,
ज्यों तलाश भ्रमर की मकरंद.....
इंद्रजीत नहीं कोई तरकस बंद,
खुशी चाहिए खुशियों की ख्वाहिश मंद ।
शब्द-शब्द से भाव बने,
और भाव-भाव से मुक्त छंद ।।
मन है मनस्वी ढूंढे आनंद,
ज्यों तलाश भ्रमर की मकरंद.....
**************************
मौलिक रचना-
गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
No comments:
Post a Comment