स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता (अन्योक्ति अलंकार का प्रयोग)
शीर्षक -"नई सुबह"
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गहरा डूबा समा है
उलझा उलझा कारवां है
पथ पर पद की
थोड़ी चहल कदमी है
एक आहट सी है
उस तरफ उजाले की
डूब के ही सही पर
किसी को तो पार करनी है
मगर लगता है कि
कर्ण अवरुद्ध से हैं
वरना शोर की तो
गड़गड़ाहट हो रही है
इस पल को रोक
रखा है लोगों ने
क्यूँ अनजान हैं कि
एक नई सुबह निकलने को
उतावली हो रही है
अब जाने भी दो
क्यों रोक रखे हो
जब अंधेरों की
विदाई हो रही है
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