Friday, September 25, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- भावी कल

रचनाकार- अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- मुक्त ,अन्योक्ति अलंकार का प्रयोग 

शीर्षक - भावी कल

देखो कैसा उन्माद हुआ,
देश का युवा भटक गया,
काबयाबी मिली भरपूर
हुआ नायक नशे में चूर,
उम्र तब भी  कच्ची थी,
मेनका सदृश आई युवती,
यौवन का आकर्षक था
प्रेम  चढ़ा उनका परवान
काम, मद में डूबा सुशांत,
ऐसे फँसा जाल में उनके
निकल ना पाया फिर, जैसे अभिमन्यु फँसा चक्रव्यूह में,
खुलती गई परत-दर-परत
काले धंधे की फेहरिश्त अब
शिकारियों की जाल में ना
जाने, फँसे हैं कितने शिकार ।

देश का युवा हो जब भटका हुआ,
तो क्या देश का भविष्य होगा ?
क्या ऐसे ही नशे मे डूबा हुआ
देश का भावी कल  होगा ।।
......................................
अन्योक्ति अलंकार-
सुशांत को कहते हुये पूरी युवा पीढ़ी को कटाक्ष किया गया ।

1 comment:

  1. आज के सच को सामने ला दिया आपने

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