निवासी-कांकेर(छ. ग.)
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक-मानो या न मानो
मानो या न मानो,
अंधविश्वास तो पाला है।
शुभ रंग सफेद,
अशुभ क्यूँ काला है।
स्लेट पर लिखते सफेद से,
मेल कितना निराला है।
गौमाता भी होती काली,
काले फूल का भी होता माली।
माँ काली का रंग भी काला,
मुरली वाले भी तो श्याम हैं।
देश में हमारे,
काले अंगूर खाना भी आम है।
मानो या न मानो,
अंधविश्वास तो पाला है।
शुभ रंग सफेद,
अशुभ क्यूँ काला है।
-कु.गरिमा पोयाम
कांकेर(छ. ग.)
आपकी कविता देश-विदेश में प्रचलित हो मैम।।
ReplyDeleteआप इसी तरह से आगे बढ़ते रहे।।।